प्रेम समस्या सप्रेम समाधान ..........................
प्रिय रोगियों इस लेख को लिखने का आशय यही है कि इस सेक्युलर देश में रहते हुए भी आप कुछ विषयों पर खुल के नहीं बोल सकते.यहाँ आपको कुछ प्रश्नों के उत्तर बिना पूछे ही मिलेंगे जिनसे हर भारतीय आए दिन दो चार हो रहा है.
सवाल- मेरे स्वामी को धन-स्याम और भ्रष्टाचार विद्रोह से प्रेम हो गया है.ये इनके दिलो-दिमाग़ पर इस तरह से छा चुका है कि पिछले दिनों ये अनशन पर बैठ गए. घर परिवार और जमे जमाये धंधे से उनका मोह भंग हो चुका है.मैं बहुत परेशान हूँ.इस चक्कर में उनकी सामाजिक मान प्रतिष्ठा को गहरा अघात पहुंचा है. कृपया मार्गदर्शन करें. -एक अंध अनुयायी, योगनगर
जवाब-देखिये अंध अनुयायी जी, मैं आपकी समस्या को समझ रही हूँ क्योंकि कुछ समय पहले तक मैं भी इसकी शिकार थी. पहले तो आप उन पर नज़र रखिये कि उनका ये अटूट प्रेम किस वजह से है.और हाँ उन्हें ये समझाने कि भरपूर कोशिश कीजिये कि इस वजह से वो न घर के रहेंगे न घाट के.जिस कस्तूरी के पीछे वो भाग रहे हैं उसकी उन्हें आदत नहीं है.
सवाल- डाक्टर जी, मेरे मनभावन जी का मन आजकल किसी चीज़ में नहीं लगता. बड़े आलसी हो गए हैं.उनके काहिलपने का आलम ये है कि अभी पिछले दिनों ही उनके ऑफिस में ही क्या चल रहा है उन्हें पता नहीं चला.मुझे लगता है कि मेरे सीधे साधे मनभावन जी पर किसी ने जादू टोना कर दिया है. जहाँ ज़रूरत होती है वहां पर भी न बोलना उनकी सबसे बड़ी कमजोरी है.अब आप ही बताएं कि उनका क्या किया जाये? वैसे पिछला रिकॉर्ड उनका काफी अच्छा रहा था.जिसके लिए उन्हें अगले पांच साल के लिए प्रमोशन भी मिला था. आपसे बड़ी उम्मीदें हैं. -राजनीतिशरण सिरमौर, राजधानीनगर.
जवाब- आपका केस ज़रा गंभीर होने के साथ-साथ थोड़ा अलग भी है, लेकिन परेशान होने की कोई आवश्यकता नहीं है.क्योंकि हमारे देश ने राजनीती के तिकड़म विज्ञान में पिछले दिनों बड़ी तेज़ी से तरक्की की है.आये दिन नए शोध हो रहे हैं.उन्हें ये समझाने का प्रयास कीजिये कि अपने काम से काम रखना अच्छी बात है लेकिन कम से कम अपने घर में क्या चल रहा है इसकी खबर उन्हें होनी चाहिए. कम्पनी के लिए वफादार होना अच्छी बात है लेकिन इमेज नाम की भी कोई चीज़ होती है.ऐसी समस्याएं स्थायी नहीं होतीं.बुरा न करने का मतलब ये कतई नहीं है कि गड़बड़ कहाँ हो रही है इसे भी न देखा जाये.
सवाल- मेरी समस्या औरों से थोड़ा अलग है.बात ये है कि मेरे बैंड बाजा को बंटवारे के दौरे पड़े थे.इस दौरान उन्हें डॉलर नाम की बीमारी हो गयी. पहले तो हम समझ ही नहीं पाए लेकिन जब मीडिया नाम का एक चेकअप कराया तब इस चूसलेवा बीमारी का पता चला. इन दिनों वे कानून नाम के अस्पताल में भर्ती हैं.कृपया ये बताएं कि उनकी इस बीमारी को जड़ से कैसे ख़तम किया जाये? - शुभचिंतक, संचारगली
ज़वाब-आपने जो समस्याएं बताई हैं उससे यही पता चल रहा है कि उन्हें डॉलर में कमाने की लत लग गयी है. बेहतर यही है कि उन्हें तिहाड़ नाम के सुधार गृह में रहने दिया जाये. और जब कभी भी ऐसे दौरे दुबारा पड़े तो उन्हें बस डॉलर दिखा दिए जायें.लेकिन ध्यान रहे कि उचित दूरी बहुत ज़रूरी. अगर तब भी कोई लाभ न मिले तो सेना नाम के प्रतिष्ठित सुधार गृह में रेफर कर दिया जाये.अगर कश्मीर वाली ब्रांच मिल जाये तो बेहतर.आप मुझे आपने केस कि साडी जानकारी रिपोर्ट सहित भेज दें.मैं इसे आपने विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहती हूँ .
सवाल- हम पुराने रईस हैं. खाता पीता परिवार है. हर तरीके का शऊर हमें सिखाया जाता गया है.हमारे बिक्की राजा ने कोई लोकतंत्र नाम का पेशा अपनाया हुआ है.पता नहीं आजकल वो लोक लाज सब छोड़कर बकबक करने लगे हैं.कोई उपाय सुझाएँ. -भड़भड़िया खंड
ज़वाब-देखिये ये उम्र का असर हो सकता है.ये भी हो सकता है कि उन्हें यही डिपार्टमेंट दिया गया हो.तो चिंता छोड़ कर आप वक़्त का इंतजार करे.हजारे नाम कि पुरवाई जब टल जाएगी तो वो खुद बा खुद शांत पड़ जायेंगे.कह सकते हैं कि ये मौसमी बीमारी है.
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