मंगलवार, 10 अप्रैल 2012

हद कर दी मौलाना जी

हे मदिरा मईया तुमने मुझे क्या कुछ नहीं दिया. आपके सानिध्य में मैं खुद को ओबामा, शाहजहाँ समझता रहा.सडक़ को सडक़ नहीं समझी रात रात भर पड़ा रहता था.कितनी सरकारें ठेके पर बैठ कर बनायीं बिगाड़ी. जो दिव्य दृष्टि आपके सेवन से पाई वो लन्दन के बड़े बड़े डाक्टर तक न दे पाए.बंद आँखों से जो नज़ारे देखे वो खुल्ली आँखों से भी न दिखाई दिए. पर हे मदिरा मईया अब सोचता हूँ की पीना छोड़ दूं.
                                         मेरी पड़ोसन अपने पियक्कड़ पति को समझ रही थी कि चुप रहो वर्ना फ़तवा आ जायेगा. पडोसी को जितना मन हो गरियाना, चाहो तो ताजमहल किराये पर उठा दो, ओबामा को ड्राईवर बना लो, एन्जिलिना जोली को कामवाली बना लो मगर चुप रहो वरना फ़तवा आ जायेगा. दारु उलूल जुलूल के पप्पू ने फ़तवा जारी किया है कि इस्लाम में सोमरस पीना गुनाह है पर तुम पियो और ऐसे वैसे मत पियो, दबा के पियो बस तलक न कहियो दारू पी के. पप्पू जी इस्लाम कि पांचवी कभी पास ही नहीं का पाए. कहीं महिलाओं को ही इस्लाम में गुनाह न साबित कर दें दारु पी के.
                                           इधर कुछ दिनों से बदले बदले से सरकार नजऱ आते हैं.  कुछ कहावतें बदलने के आधार नजऱ आते हैं. जैसे कि मुल्ला की दौड़ बस महिला तक, आसमान से गिरे और महिला पर अटके.मालाएं छोटे कपडे न पहने,मोबाईल पर बात न करें. महिलाएं अगर न होती तो मुल्ला न होते, मुल्ला न होते तो फतवे न होते. सब कुछ जोड़ घटा जके पियक्कड़ों सावधान! सब कुछ करियो पर तलक तलक न खेलियो दारु पी के वर्ण अवाही वाला फ़तवा आ जायेगा. तो साथ में कहिये..... लकड़ी की काठी काठी का ???? का घोडा बिल्कुल नहीं. काठी का कठमुल्ला.

लीक हो गया न..





लीक से हटकर काम करे के अपने मज़े हैं. कुछ भी करो लीक से हटकर. चो का,लफंगई करो, बयाँ बजी करो मगर लीक से हटकर. लीक से हटकर गए काम नहीं होते लीक होते हैं. लीक से हटकर काम करने की लत पश्चिम से इम्पोर्टेड लगती है. जैसे मॉडल ने पहना दुनिया का सबसे लम्बा गाउन,सबसे लम्बे नाख़ून, सबसे लमे समय तक किस करने का रिकॉर्ड. सभी यूनीवर्सिटी में एक ने पाठ्यक्रम चलाना चाहिए और विषय लीक में डिप्लोमा होना चाहिए. इसका भी अपना एक अलग इधर लीक से  हटकर काम करनेवालों का अम्बार लगा हुआ है.लीकेनजायटिस नमक लीकनेवा बीमारी अभी तक नेताओं और मंत्रालयों में पई जाती थी पर उमर की सही तारीख न ज्ञात होने की वजह से ये घटक बीमारी सेना तक पहुँच चुकी है.इस लीकनेवा बीमारी के लक्षण सबसे पहले मंत्रालयों में पाए गए.
                                                                     लीक भी अलग- अलग टाईप की होती हैं.लीक से हटकर काम करते समय कुछ सावधानियां भयंकर रूप से अनिवार्य होती हैं क्यूंकि लीक से हटकर काम करते वक़्त लीक होने के खतरे एक सौ एक फ़ीसदी बढ़ जाते हैं. उदाहरण के तौर पर जनरल सिंह ने नौकरी के रिटायर्मेंटहोवा मोड़ पर लीक से हटकर काम करने की कोशिश की पर सावधानी न बरतने की वजह से बी तरह से लीक हो गए. इनके केस से हमें यही सीख मिलती है की लीक करने के समय का विशेष ख्याल रखा जाय.लीक करते समय तो बड़ा आनंद अत है पर लीकेज के के फैले रायते को बटोरना बड़ा ही कठिन कार्य होता है.ऊपर से दिग्गी और आजम खान जैसे लीकेज केमहराठी अपने अपने तरीके से इसे फैलाना शुरू कर दें तो ये मीडियाअवतार धारण कर लेता है.
                                                                               कई बार लीकेनजायटिस की बीमारी जान कर फैलाई जाती है की आ लीकेनजायटिस इसे लीक कर दे. लीक करौवा किसी भी हद तक जा सकते हैं.जनरल के मामले में भी यही आसार नजऱ आ रहे हैं.शायद हथियार बनाऊ कम्पनियाँ हमारी लीकेज क्षमता का लाभ उठाकर अपने कुछ सामान बेचा चाहती है. तो इस प्रकार हमने जाना की लीकेनजायटिस की बीमारी दाल असरकारक है. एक को हनी तो दुसरे को उसी मात्रा में लाभ पहुंचती है.तो आगे से जब भिलीक्से हटकर काम करिए तो लीक होने के खतरों का गहन अध्ययन कर लीजिये.
                                                        
      

हवा हुए हवाई रजा




गृह मंत्रालय की नयी मांग के साथ आज सवेरे की नींद खुली.सुनो जी सोच रही थी कि सांई बाबा के दर्शन कर आयें साथ में शिरडी वाले. साईं दर्शनसे तो कोई फर्क न पड़ा पर शिरडी के के साईं बाबा कि डिमांड ने भीतर तक सुनामी मचा दी. लगा जैसे किसी ने कोटेदार के यहाँ से बिना कंकड़ वाला चावल लाने को कह दिया हो. शनि देव कि तरह शिर्डी के साईं भी इधर कुछ दिनों से डिमांड में हैं.श्रीमती जी  कि मांग कथा जारी थी और मैं असहाय भक्त कि तरह सब सुन रहा था.क्या है न इधर रेलों में सफऱ करना बड़ा एडवेंचरस हो गया है.कभी रेल पटरी पर से उतर जाती है तो कभी रेलें ही एक दूसरे पर चढ़ जाती हैं. सोचती हूँ की हवाई जहाज से शिर्डी के डरेशन कर आऊं.आजकल पानी और दर्शन दोनों ही बड़े दुर्लभ हैं, लायीं लगने पर भी नहीं मिलते.हवाई यात्रा से हमारी भक्त केटेगरी भी चेंज हो जाएगी.जमीन तो बची नहीं थी पैरों टेल बचे- खुचे गड्ढे भी खिसक द्दड्ड4 इ. मैनें समझाना शुरू किया- देखो भागवान!ये हवाई जहाज के लक्षण ठीक नहीं.मानलो टिकट मिल्भी गया तो क्या गरती की एयरपोर्ट पर रंगे सियार से नहीं देखे जायेंगे.अगर बीच उदंमें ही हड़ताल पर चले गए पायलट या फिर डीजल,पेट्रोल,केरोसिन या जो कुछ भी पड़ता हो वाही चुक गया तो.बीच में दूसरा प्लेन भी नहीं बदल सकते न.या फिर तनख्वाह न मिलने से बौराए पायलट ने फुल स्पीड में बिना लायसेंस के उड़ा दिया विमान और तुम्हें मिचली आने लगी तो.शीशा खोल के उलटी भी न कर पाओगी.ये भी नहीं कह सकती कि विमान वाले डरेबर विमान जऱा धीरे हांको जी.
                                                                     मन कि जो हवाई जहाज चुना है वो दारू वाले राजा का है.चाहे तो अपने बोईंग से भर जावेंगे तेल हवा में.पर फिर से कहे देते हैं ये हवाई यात्रा के लक्षण ठीक नहीं.और तो और ये भी हो सकता है कि यात्रा के दौरान पता चले कि 'प्रिय यात्री जिस विमान में आप यात्रा कर रहे हैं उसका लायसेंस रद्द हो चूका है,कष्ट के लिए खेद है'.
                                                                               पर मेरे सरे ब्रह्मास्त्र  खाली पीली बेकार साबित हुए.श्रीमती जी कहने लगीं अपने दारु वाले राजा सा मैंने कहीं न देखा.ऐसा बगुला भगत तो बिना बत्ती कि टॉर्च से भी धुन्धने पर न मिले.अरे! हवाई जहाज में तेल तो अपने तीन चार द्वीप किराये पर उठाकर डलवा दें. उनके तो अपने खुद के ही चार-चार बोईंग वाले विमान हैं चाहें तो...शिर्डी टू
दिल्ली चलवा दें.सोचो जब उनकी नौकाएं ही महारानी हैं तो खुद महाराजा कैसा होगा. रही बात डरेबर कि तनख्वाह की तो तो एक पार्टी के खर्च से चूका दें.और सुनो दिवालिया हों उनके दुश्मन .ऐसा कौन सा खेल है जिस पर उन्होंने मुंह न मारा हों भला.ऐसा हिम्मती काम तो दारुवाले राजा ही कर सकते हैं.हाथ में हीरे का कंगन और गले में सोने का लौकेट पहन कर भीख मांगी है.दिलदार इतने कि बापू के सरे सामान उतने कि रकम चूका कर लाये जितनी बापू ने सपने में न सोची हों.महिला सशक्तिकरण उनके कारन ही फल-फूल रहा. साल भर में एक कैलेण्डर छपवाने के लिए आधे साल विदेशों में रहते हैं.अब बताओ जी कौन सी कमी है मेरे दारुवाले राजा में.मैं उसी दीनता से मुंह लटकाए खड़ा रहा और सोचता रहा- दारु बनाने से दारुबाज थोड़े न हों गया कोई.     
               
फूल डे
                
आज पहली तारीख है. ये पहली बाकी वाली पहलियों से अलग है. पहली की तो बात ही अलग होती है क्यूंकि पहली चीजं से लोगों का भावनात्मक जुडाव होता है. पहली कार, पहली मार, पहली जॉब और पहला प्यार तो कम्पलसरी सा लगता है. डे मतलब सिर्फ हॉली डे या सप्ताह के सात दिन नहीं रह गए. डे सेलीब्रेट करने का फैशन बालीवुड में हीरोईन के ब्यॉयफ्रेंड बदलने जैसा हो गया है. साल में अगर सात सौ तीस दिन भी हों तो कम पड़ जायें डे- मनौव्वल के लिए. आज फूल डे है. फूल से गुलाब या चम्पा चमेली मत समझ लीजियेगा. चलिए इसे जऱा दूसरे तरीके से समझते है. खबर है कि पेट्रोल के दाम घट सकते हैं. अभी तक अदालत में जुर्म साबित करना पड़ता था, नेताओं को बेदाग साबित किया जाता था, कौन सी हेरोईन का अफेयर किसके साथ है ये साबित करना पड़ता था अब यूपी सरकार कह रही कि बहुत साबित कर लिए जऱा खुद को बेरोजगार साबित करके दिखाइए तो जाने. युवराज पॉलिटिक्स से सन्यास की घोषणा करें. पुलिस थानों में रात की ड्यूटी                                           जागते मिलें, सरकारी बाबू लोग घूसपान निषेध घोषित कर दें. पाकिस्तान पूरा का पूरा कश्मीर फ्रेंडशिप डे पर भारत को गिफ्ट कर दे वो भी पहली तारीख को तो समझिये की फूल डे है.
                                                                   इस दिन कई तथाकथित बुद्धिमान दूसरे बुद्धिमान को फूल बनाने की मूर्खई करते हैं. और फिर उल्लू बनाने की ख़ुशी में फूल फूलकर कुप्पा होते है. ये कुछ वैसा है जैसे किसी फ्लॉप फिल्म पर हिरोईन कहे की मैं अलग तरह की फिल्में करना चाहती हूँ, जहाँ लिखा हो कि थूकना मना है वहां पिच्च पिच्च करना छोड़ दें. या फिर हिंदी फिल्मों से रोमांस का लोप हो जाये.तो समझिये कि आज फूल डे है.                 
                                                                 

गुरुवार, 5 अप्रैल 2012

मोहे गरीब न कीजो

 एयरकंडीशंड कमरे में बैठकर हजारों का सूट पहने हुए एक साहब जी ने गरीबी को अपने अफलातूनी तराजू बाँट से तोला है.  उनकी मानो तो शहर में 28.65रूपये और गांवों में 22.42 कमाने वाला गरीब नहीं. गज़ब की बनियागीरी लगाई है मानक तय करने में साहब जी ने। साफ़ पता चल रहा है कि परदेश से पढाई कर के आ रहे.  अरे चचा दशमलव की गिनती तो छोड़ दिए रहते.बताओ तो भला अब बेचारा अनपढ़ गरीब कैसे गुणा भाग लगाएगा. गरीबी के मुंह पर खाली जूता मारे होते तब पर भी चलता पर अपने तो भिगो भिगो के मारा है. जो चवन्नी अठन्नी  कोई लेने को तैयार नहीं उसे भी नहीं छोड़ा. पता नहीं कौन सा बखत चल रहा अब गरीब गरीब न रहा . साहब जी ये बताओ कि गरीबी की ये लेडीज रेखा बनाने की कितनी तनख्वाह पाते हैं. गरीबी की फ़ील्ड में बिना उतरे हवाई जहाजी दौरा कर लिया आपने. कैलोरी नाम की लोरी सुन के नींद नहीं आती जब तक अन्न न जाये पेट में.  
                                                       क्या जरुरत थी ये गंजई दिखाने की.चवन्नी अठन्नी के फेर में पड़ गए.वैसे गलती आपकी भी नहीं है. अब राजधानी में कहाँ पाए जाते हैं गरीब. वहां के तो कुत्तों का स्टेटस भी ऊंचा है. गरीबी तो खुजली हो गयी जितना इलाज करो उतना ही बढ़ेगी. राजधानी वाले एक दूसरे का स्टेटस यूं पूछते होंगे. क्यूँ तू कौन सा वाला गरीब है - सायकिल वाला गरीब या फिर मोटरसायकिल वाला.अगर है तो नीला कार्ड बनवा ले. मारुती 800  वाले तो एपीएल कैटेगरी में आते हैं. किटी पार्टियों में लिपस्टिक  बिंदी और साड़ी के बजाय गरीबी चर्चा में है. मिसेज वर्मा मिसेज शर्मा से कह रही थीं आप तो तरक्की कर रहीं हैं अल्टो से मर्सिडीज वाली गरीब हो गयीं. हमको देखिये अब भी मेट्रो वाले गरीब ठहरे. 
                                              गरीबी का भी अपना स्टेटस हो गया है. आईटम सॉन्ग पर  न के बराबर कपड़ों में थिरकती हीरोइनों के दिल से पूछो गरीबी का हाल  या फिर नयी फिल्म के लिए जीरो से माईनस के फिगर में जाती बालाओं से. अबके नवरात्रों में मईया से यही दुआ रहेगी की किसी मंत्री का कुत्ता बना दियो, किसी हीरोईन के पैर की सैंडिल बना दियो पर मईया मोहे गरीब न कीजो.अगर फिर भी कीजो तो सिर्फ एक हवाई जहाज वाला गरीब कीजो, डायमंड वाला न सही गोल्ड वाला गरीब कीजो पर हे मईया कुछ भी कीजो मोहे गरीब न कीजो. साहब जी गरीबी अगर बदनाम हुई है तो सिर्फ आपके कारन. वरना गरीबी बड़े गहरे पानी की मछली थी आप जैसे मछुआरों के हाथ न आनी थी.  पर आ गयी न तो अब देख लीजिये हाल अपनी आँखों से.पता नहीं आपके स्कूलों में वो कहावत  पढाई जाती की नहीं -जिसकी बंदरिया होती है उसी से नाचती है.अगर नचा दी है तो हाल यही गरीबी वाला होगा. साहबजी हमरी न मानो तो  आपने बिग बी से पूछो की कैसे पोलिटिक्स वाली बंदरिया के फेर में पड़े थे.जित्ता रुपया आप बताये रहे उत्ते में तो बच्चे का लंगोट न आवे है आप उतने में गरीबी हटा रहे. पढ़े लिखे लोग बाग ऐसे मजाक कर देते हैं कि पैर तो छोड़ो पूरा का पूरा आदमी जमीन में धंस जाये. मईया ऐसे में सब कुछ कीजो पर गरीब न कीजो.
                                 

मंगलवार, 3 अप्रैल 2012

अन्ना मेरे कुछ भी करना पर अनशन पे मत जाना.लोकपाल के लिए अब दूजा ढूँढो कोई बहाना. पिछले अनशन पर जो चिल्ल-पों मीडियावालों ने मचाई थी अबकी चिया के बैठे रहे. आपको सचिन और नक्सलियों ने ओवरटेक कर दिया है. पूरे पन्ने से एक कॉलम में आ गए. ऐसा गिराव तो सेंसेक्स में भी कभी न आया. हाँ चैनल वाले अन्ना अनशन को वेलेनटाइन डे की तरह लेते हैं.उनका अनशनप्रेम जगज़ाहिर है इसीलिये मुफत की सलाह दे रहे हैं कि अन्ना मेरे कुछ भी करना पर अनशन पे मत जाना.सरकार ने जो तिकड़मबाजी लगायी अब तो जान गए न.गधे की दुलत्ती तो इन्सान भूल सकता है पर सरकारी दुलत्ती नहीं. चलो जो भी हुआ उसे जाने दो. बहुत कर लिए ये धनश्याम धनश्याम. काजल की कोठरी में से आप तो साफ़ सुथरे निकल आये पर आपकी अन्नासेना कालिख से होली खेलती निकली बाहर. हाय रे! कैसी आपकी तक़दीर, लोकपाल में फंस गया जाने कौन सा तीर. जऱा अपने  तीन वानरों की आँखों में कूदकर डुबकी लगाओ और देखो कौन से वाले सपने देख  रहे  हैं लोकपाल के बहाने. तीनों को सेंटरफ्रेश खिलाओ. यूं ही मुंह खोलते रहे तो बंटाधार कर देंगे आपका.केजरी जी नायक वाली स्टाईल में सब बदलना चाहते हैं. सबसे रीसेंटवाला बयानी दौरा पड़ा है जिसमें कह रहे कि बागी तो बीहड़ में रहते हैं संसद में डाकू रहते हैं.अब ये भी बता दीजियेगा कब मेहमान बन रहे आप संसद के.
                                                     काहे को बईयाँ मरोड़ते हो बेचारी अबला सरकार की. मरोड़ते कम हो खुद ज़्यादा तुड-मुड़ जाते हो. चिंता को दूर से ही प्रणाम कर लो. चिंता चिता के समान है. आप  तो ब्रह्मचारी ठहरे और चिंता- चिता दोनों लेडीज. सरकार और राजनीति भी लेडीज, दोनों बड़ी वाली झु_ी हैं .अब तो छोडो इनका हाथ और पहचानों इनकी ज़ात.लोकपाल के लिए अब दूजा ढूँढो कोई बहाना. और ये क्या जिद पकड़ लिए हैं चौदह मंत्री टाईप के गुंडों पर ऍफ़आईआर दर्ज करने की. अगर ऐसा हुआ तो सरकार जेलों से ही चला करेंगी. अन्ना मेरे कुछ भी करना पर अनशन पे मत जाना.लोकपाल के लिए अब दूजा ढूँढो कोई बहाना. पिछले अनशन पर जो चिल्ल-पों मीडियावालों ने मचाई थी अबकी चिया के बैठे रहे. आपको सचिन और नक्सलियों ने ओवरटेक कर दिया है. पूरे पन्ने से एक कॉलम में आ गए. ऐसा गिराव तो सेंसेक्स में भी कभी न आया. हाँ चैनल वाले अन्ना अनशन को वेलेनटाइन डे की तरह लेते हैं.उनका अनशनप्रेम जगज़ाहिर है इसीलिये मुफत की सलाह दे रहे हैं कि अन्ना मेरे कुछ भी करना पर अनशन पे मत जाना.सरकार ने जो तिकड़मबाजी लगायी अब तो जान गए न.गधे की दुलत्ती तो इन्सान भूल सकता है पर सरकारी दुलत्ती नहीं. चलो जो भी हुआ उसे जाने दो. बहुत कर लिए ये धनश्याम धनश्याम. काजल की कोठरी में से आप तो साफ़ सुथरे निकल आये पर आपकी अन्नासेना कालिख से होली खेलती निकली बाहर. हाय रे! कैसी आपकी तक़दीर, लोकपाल में फंस गया जाने कौन सा तीर. जऱा अपने  तीन वानरों की आँखों में कूदकर डुबकी लगाओ और देखो कौन से वाले सपने देख  रहे  हैं लोकपाल के बहाने. तीनों को सेंटरफ्रेश खिलाओ. यूं ही मुंह खोलते रहे तो बंटाधार कर देंगे आपका.केजरी जी नायक वाली स्टाईल में सब बदलना चाहते हैं. सबसे रीसेंटवाला बयानी दौरा पड़ा है जिसमें कह रहे कि बागी तो बीहड़ में रहते हैं संसद में डाकू रहते हैं.अब ये भी बता दीजियेगा कब मेहमान बन रहे आप संसद के.
                                                     काहे को बईयाँ मरोड़ते हो बेचारी अबला सरकार की. मरोड़ते कम हो खुद ज़्यादा तुड-मुड़ जाते हो. चिंता को दूर से ही प्रणाम कर लो. चिंता चिता के समान है. आप  तो ब्रह्मचारी ठहरे और चिंता- चिता दोनों लेडीज. सरकार और राजनीति भी लेडीज, दोनों बड़ी वाली झु_ी हैं .अब तो छोडो इनका हाथ और पहचानों इनकी ज़ात.लोकपाल के लिए अब दूजा ढूँढो कोई बहाना. और ये क्या जिद पकड़ लिए हैं चौदह मंत्री टाईप के गुंडों पर ?फ़आईआर दर्ज करने की. अगर ऐसा हुआ तो सरकार जेलों से ही चला करेंगी. तब का करिहैं अन्ना भैया. इसीलिए कह रहे अन्ना मेरे कुछ भी करना पर अनशन पे मत जाना. 

        

गुरुवार, 29 मार्च 2012

मेरी ज ज जान....


सड़क पर पैदल चल रहे एक पैदल टाईप के आदमी से सायकिल \वाला चिल्लाये और कहे कि सड़क तुम्हारे बाप कि है क्या? मोटरबाईक वाला  झिड़कता है ...ऐ रिक्शा किनारे और कार वाला हो तो समझ लीजिये कि सड़क सच्चीमुच्ची उसी के बाप की है.आपको बर्दाश्त के बाहर बड़ी जोरों की लगी है और निपटने न दिया जाए. मधुशाला के मद्चूर पुजारी को बस दो चम्मच सुबह-शाम पिलाई  जाये.सरकारी शौचालयों में एक रात /पैसे देकर रहने को कहा जाए.बीवी के हाथ पड़ोसन के साथ वाली तस्वीर लग जाये.... यानी कहीं भी कभी भी जब आपकी जान पर बन आये तो समझो नामवाधिकार लुट रहा है मेरी जान. हाँ जी सही सुन रहे हैं आप नामवाधिकार क्यूंकि मानवाधिकार बस नाम का बचा है.
                                                                           एम्बेसडर का सायरन आपके कानों में लगा दिया जाये और उसपर भारत सरकार का बैनर टांग दिया जाये.इस ज़माने के किसी पढ़े-लिखे को  किसी नेता की रैली में उसकी बकैती सुनने के लिए निपट अकेला छोड़ दिया जाये.आज के बच्चों को उनके मोबाईल से महज़ पच्चीस सेंटीमीटर दूर कर दिया जाये या फिर फेसबुक पर च टियाने से रोक दिया जाये. नेताओं से एक घंटे सच बोलने को कहा जाये. पुलिस गलती से मौका -ए-वारदात पर पहुँच जाये. फास्ट टरैक  अदालतों के मुकदमें महीनेभर में सुलट जयेएं.पडोसी का कुत्ता घर के दरवाजे को खम्भा समझकर टांग उठाकर चला जाये तो..तो समझो नामवाधिकार लुट रहा है मेरी जान.
                                                   अमरीका डार्लिंग को इराक,अफगानिस्तान में नामवाधिकार की जाँच कास ठेका दे दिया जाये,आईएसआई को नोबेल प्राईज़ से नवाज़ा जाए.ड्रैगन को इसकी देख-रेख में भिड़ा दिया जाये.  इजराईल और इरान को आपस में समधी बना दिया जाये.लिट्टे को श्रीलंका में लोकतान्त्रिक पार्टी का तमगा दे दिया जाये.प्रधानमंत्री के रूप में दलाईलामा ड्रैगन को बौद्ध धर्म ग्रहण करवाएं.मदर इण्डिया इन सबको गोद में बिठा कर सामान प्रेम बरसाएं तो... तो समझो नामवाधिकार लुट रहा है मेरी जान.
                                                                              तुम छींको तो जुकाम मदर इण्डिया को हो जातो है.घुड़की तो दे ली कश्मीर को लेकर फिर क्यूँ इतना खार खाए बैठे हो लंका मेरी जान. और पाकीजा तुम तो जिंदा ही हो बस मेरे विरोध पर. जीने मत देना मुझको और हम तुम्हें आक्सीज़न देते रहेंगे मेरी जान. सवा सौ- सवा सौ चूहे खाकर क्यूँ हज पर जाती हो अमरीका मेरी जान....तो कहीं भी कभी भी जब आपकी जान पर बन आये तो...तो समझो नामवाधिकार लुट रहा है मेरी जान.