शनिवार, 1 दिसंबर 2012

साहब मेरा भी कुछ बनता है

                           
        भाया आजकल के मंहगाई के इस राष्ट्रीय दौर में लेन देन के मामले में खास  चौकन्ना रहना पड़े है.. पड़ोस की मिसेज मेहता पाव भर आलू उधार ले गयीं थी. लौटने के नाम पर दुबारा मुंह तो जाने दो पीठ तक नहीं दिखाई. क्या कहें पाव भर आलू के लिए व्यवहार खऱाब कर लिया. अभी परसों ही शर्मा जी सुई मांग मांग कर ले गए थे. सुई तो जाने दो धागा तक नहीं लौटाने आये. मैंने याद दिलाया तो उलटे मुझे ही गिनाने लग पड़े. आजकल एक नए तरह का सामाजिक बदलाव देखने को मिल रहा है. लोग लेना तो सीख रहे हैं पर लौटाने के नाम पर चुनावी वादे जैसा बिहेव करने लग जाते हैं. इधर मैंने लौटाने के नाम पर भी कुछ बयाने लिए हैं. बित्ते भर के थे तभी से घुट्टी पिलाई गयी है जिसका लो वापस ज़रूर करो. तो सोचा जब वापिस करना है तो कुछ लेना पड़ेगा न. राष्ट्र कैश सब्सिडी नाम देनदारी नाम की नयी हवा से झूट रहा है. मौसम विभाग की मानें तो ये हवाएं उत्तर में दिल्ली के राम लीला मैदान से चली थीं और अब पूरे देश को चपेट में ले लिया है. राम लीला में कुछ आम आदमी टाईप के लोगो ने धरना इससे सबसे ज्यादा प्रभीवित होने वालों में सरकार, वाड्रा नाम के दामाद और इसी परिवार के कई तथाकथित सदस्यों के हताहत होने की ख़बर है. बड़े बुज़ुर्ग कहते हैं की लेन देन की बातें मौका और नजाकत देख कर करनी चाहिए. सरकार ने दोनों देखी हैं. अपनी कुछ योजनाओं में से सफ़ेद हाथी जैसी जो हैं उन्हें चुन लिया है. नों साल आम आदमी की खूब ली है  अब देने का सोच रही है. हर तरफ़ से अजीब अजीब सी आवाजें सुनाई पडऩे लगी हैं. मंहगाई के बोझा लादे चीकट सा आम आदमी मांग रहा है, स्विस बैंक वाले अपना हिस्सा मांग रहे हैं, 2 जी वाले तो पता नहीं कब से गला फाड़ रहे, कोलगेट वाले हिस्सा न देने पर सब काला कर देने की धमकी दे रहे हैं. मुझे तो समझ नहीं आ रहा ये सरकार सबका पैसा भला कैसे दे पायेगी. अगर बंगाल वाले को देती है तो पंजाब वाले चिल्ला पड़ते हैं. पर देना तो पड़ेगा भई!  इतने सालों से दूसरों के पैरों पर जो खड़ी है. हम भी समझते हैं इतना आसान थोड़े ही है.पर मैं तो अदना सा आम आदमी हूँ. थोडा है और थोड़े की ज़रूरत मेरा दर्शन रहा है. पर ये सरकारें न थोडा देती हैं और न थोड़े में बसर करने देती है. हो सके तो मिसेज मेहरा के घर कुछ गैस सिलेंडर, बबलू की गड्डी में पेट्रोल डलवा दियो बेचारी की गर्ल फ्रैंड ने उसका जीना हराम कर दिया है, पड़ोस की विमला आंटी सब्जी के ठेले पर सब्जी सूंघ सूंघ कर रख देती हैं. कोई सब्जी वाली योजना भी चलवा दो न. जिसका जितना हिस्सा होगा दे देना और सनद रहे साहब इस आम आदमी का भी कुछ बनता है.                           -संध्या यादव

3 टिप्‍पणियां:


  1. बहुत सुंदर ...बधाई .आप भी पधारो
    http://pankajkrsah.blogspot.com
    स्वागत है

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  2. बहुत सही !
    आपके व्यंग्य की धार यूं ही बनी रहे।

    सादर

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