सोमवार, 31 अक्तूबर 2011

औरत

हर तीज त्यौहार पर 
होती है तुम्हारी पूजा 
घंटे घड़ियाल बजाकर 
नैवेद चढ़ाये जाते हैं 
तुम्हारे सामने शीश झुकाकर
तुमसे ही छुटकारा 
पाते हैं
नवरात्रों में महिषासुर मर्दन 
करने वाली 
दहेज़ की ख़ातिर
गहरी नींद में ही 
जिंदा जला दी जाती है 
अजंता एलोरा की गुफाओं में 
उकेरे गए तुम्हारे बिम्ब 
सदियों से हिस्सा हैं 
हमारी महान संस्कृति का 
फिर क्यूँ पैरहन पर तुम्हारे 
प्रश्नचिन्ह उठाये जाते हैं 
बांधती हो ढेरों और दुआएं 
बुरी नज़र से बचाने के लिए
 फिर एक दिन अचानक 
भरे बाज़ार में डायन
करार दी जाती हो
सहन नहीं होती छोटी सी 
चोट भी जिगर के टुकड़े की 
हंसी आती है तुम पर 
जब जिस्म पर पड़े 
काले निशान 
बाथरूम में गिरी थी 
कहकर छिपा ले जाती हो 
सचमुच!
ज़वाब नहीं तुम्हारा
कभी सीता बनकर 
अग्नि परीक्षा देती हो 
तो द्रौपदी के रूप में 
पांच पांडवों द्वारा 
जीत ली जाती हो 
अमर हो गयी राधा तुम 
कहकर बहलाई जाती हो
अजब प्रेम भी मीरा का 
जो विष-प्याला अधरों से 
लगाती हो 
रूपकुवंर तुम भी हिस्सा हो 
उस औरत का ही 
मरकर सती मईया
कहलाती हो 
नशे में धुत बेटे ने 
मार दिया कल माँ को  
शायद बूढी उँगलियाँ 
रोटी जल्दी न सेंक पाई थीं 
नहीं दूँगी उदाहरण 
की तुम हवाई जहाज 
उड़ाती हो 
देश चलती हो 
अन्तरिक्ष परी कहलाती हो 
देखा था तुमको 
पीठ पर बच्चा बांधे
आठ ईंटे सिर पर
ढोते हुए 
और अपनी जिद पर आओ तो 
इरोम शर्मिला बन जाती हो 
बेटी,बहु, माँ और 
प्रेमिका बनकर 
भारती हो जीवन में रंग 
शांति का नोबेल समेटे 
आँचल में 
औरत कहलाती हो                                                      -संध्या  
 
     
 
 

4 टिप्‍पणियां:

  1. घंटे घड़ियाल बजाकर
    नैवेद चढ़ाये जाते हैं
    भरे बाज़ार में डायन
    करार दी जाती हो
    दहेज़ की ख़ातिर
    गहरी नींद में ही
    जिंदा जला दी जाती है
    शांति का नोबेल समेटे
    आँचल में
    औरत कहलाती हो
    स्त्री के हालत की सच्ची तस्वीर.... !

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  2. नारी की व्यथा कथा को बखूबी उभारा है

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